भिंडी काशी लालिमा (रेड लेडी फिंगर)बीज

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NATIONAL SEEDS CORPORATION LIMITED

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विशेषताएं :

  • इसे भारतीय जलवायु / मौसम की स्थिति में उगाया जा सकता है।
  • यह फसल ग्रो बैग किचन गार्डनिंग, टेरेस गार्डनिंग और रूफ टॉप बालकनी गार्डनिंग ले लिए उपयुक्त है।
  • रेड ओकरा को हरे ओकरा के समान साल में दो बार उगाया जा सकता है; 
  • भिंडी के बीज बोने के लिए उन्हें कम से कम 10-12 घंटे भिगोना चाहिए; फिर एक घंटे के लिए छाया में सुखाए इससे बीज का अंकुरण बढ़ जाता है।
  • फिर उन्हें 25-30 सेमी दूरी पर लगा दे।

भारत में लाल भिंडी की खेती करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. इससे पहले इसकी खेती पश्चिमी देशों में ही की जाती थी. लाल भिंडी की खेती करने का रुझान किसानों में इसलिए भी बढ़ रहा है कि भिंडी की सामान्य किस्मों की तुलना में इसके भाव बाजार में अधिक मिलते हैं. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान लाल भिंडी की भारतीय किस्म भी विकसित कर ली है. जिसे काशी लालिमा नाम दिया गया है. इससे पहले भारत में यूरोपीय किस्मों की खेती होती थी. लेकिन वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के साइंटिस्टों ने 8 से 10 साल की मेहनत से इसे तैयार किया है. 

लाल भिंडी औषधीय गुणों से भरपूर होने साथ आर्थिक रूप से भी मजबूती प्रदान कर सकती है. सामान्य भिंडी जहां 20 से 30 रुपये किलो ही बिकती है वहीं लाल भिंडी की कीमत 400 रुपये तक होती है.  साल में दो मर्तबा लाल भिंडी की खेती कर अच्छी कमाई की जा सकती है.

लाल भिंडी खाने के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?

लाल भिंडी में Anti Oxydent और Iron भरपूर पाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. इसका स्वाद भी सामान्य भिंडी से अलग है. आजकल स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए लाल भिंडी को लोग हाथों हाथ ले रहे हैं. साथ ही लाल भिंडी को पकने में भी कम समय लगता है.

स्वस्थ पाचन: अपने आहार में लाल भिंडी को शामिल करने का मुख्य कारण है इससे आपके कुल फाईबर सेवन में होने वाली उल्लेखनीय वृद्धि। भिंड़ी में पाया जाने वाला लसदार फाइबर अधिकांश भोजन को आपके पाचन तंत्र के माध्यम से स्थानांतरित करने में मदद करता है। अर्थात मल त्याग अधिक नियमित होंगो और पेट की फुलन, दर्द, कब्ज और अधिक गैस जैसी जठरांत्र समस्याएं कम हो जाएंगी। इसमें ढेर सारा पानी होने के कारण दस्त लगने से रोकता है। अंत में, फाइबर शरीर में अधिक मात्रा में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को भी बाहर निकालने में मदद करता है।

नेत्र दृष्टि को तेज करता है: लाल भिंडी में बहुत ही उच्च मात्रा में विटामिन ए एवं बीटा, कैरोटीन, जेनथेन, और लुटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट मौजूद हैं। एंटीऑक्सीडेंट शक्तिशाली यौगिक हैं जो मुक्त कणों को नष्ट या बेअसर करते हैं जोकि सेलुलर चयापचय के खतरनाक प्रतिफल हैं। मुक्त कण शरीर में कोशिकाओं को हानि पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं, साथ ही नत्रहीनता के लिए भी जिम्मेदार हैं। अपने आहार में अधिक मात्रा में भिंड़ी की सब्जी को शामिल करने से आपकी नजर तो तेज होगी ही साथ ही आख की मैक्यूला के व्यपजनन और मोतियाबिंद से भी बचाएगा।

स्वस्थ त्वचा: शीघ्र उपचारात्मकता, दागों तथा मुंहासों के निशानों को कम कर एवं झुर्रियों को दूर भगाते हुए विटामिन ए एंटीऑक्सिडेंट त्वचा के स्वास्थ्य की रक्षा करने में समर्थ हैं। यह इसलिए क्योंकि एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों को बेअसर करने में सक्षम हैं जिन्होंने शायद त्वचा कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया हो।

प्रतिरक्षा प्रणाली: लाल भिंडी के विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट अंश मुक्त कणों से लड़ने में मदद करते हैं, साथ ही इसमें उच्च मात्रा में मौजूद विटामिन सी सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली को बलशाली बनाता है। विटामिन सी अधिक सफेद रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित कर सकता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर बनाने वाले अन्य विदेशी रोगजनकों और बीमारियों से लड़ सकते हैं।

रक्तचाप और हृदय का स्वास्थ्य: भिंडी पोटेशियम सहित विटामिन और खनिज दोनों का एक अच्छा स्रोत है, जो मानव स्वास्थ्य का एक अनिवार्य पहलू है। पोटेशियम शरीर में उचित द्रव संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है क्योंकि यह सोडियम को संतुलित रखता है। इसके अलावा, पोटेशियम रक्त वाहिकाओं और धमनियों को तनाव मुक्त रहने में मदद करता है, अतः यह रक्तचाप को कम करता है और हृदय प्रणाली पर से तनाव को भी कम करता है। अर्थात् आतंचन और धमनीकलाकाठिन्य बहुत हद तक कम हो जाएंगे।


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